वाह
रे सरकार और हाय रे बेचारी जनता ! हमारी प्रदेश सरकार के अजब-गजब खेल तो
देखिए . एक तरफ ये लोग केंद्र पर बिहार की अपेक्षा करने का आरोप लगते हैं,
राज्य की पिछड़ी स्थिति का हवाला देकर विशेष राज्य का दर्जा मांगते हैं,
मिलना भी तय है. दूसरी तरफ खुद पिछड़े कोसी इलाकों के साथ सौतेला व्यवहार
करने में लगे हैं. विशेष राज्य दर्जा की तरह बिहार सरकार को कोसी इलाके को
विशेष दर्जा देना चाहिए. फिलहाल मुद्दा ये है कि इतने सालों तक सत्तारूढ़
सरकार ने राज्य के इस अभिन्न भाग की बदहाली दूर करने के
लिए सार्थक प्रयास क्यूँ नहीं किया? साधन, शक्ति, व्यवस्था सब तो इनके पास
थी. फिर कोसी क्यों पिछड़ेपन का दंश झेलने को मजबूर है! कहीं ये सरकार उस
नीरो की तरह तो नहीं जो रोम के जलते वक्त आराम से बैठा बांसुरी बजा रहा था.
लगता तो कुछ ऐसा ही है.
समय
आ गया है कि आरोप-प्रत्यारोप और वोट बैंक की राजनीति छोड़ सरकार अपने घर को
सवांरने के बारे में सोचे. अगर अब भी इन्हें होश नहीं आया तो जनता को
सत्ता परिवर्तन करने में वक्त नहीं लगेगा. कोसीवासियों के विकास की जायज
मांग तो निश्चय ही पूरा होगा. विकसित बिहार का सपना होगा साकार होगा. जब
कोसी क्षेत्र को मिलेगा अपना अधिकार!
समय
आ गया है कि आरोप-प्रत्यारोप और वोट बैंक की राजनीति छोड़ सरकार अपने घर को
सवांरने के बारे में सोचे. अगर अब भी इन्हें होश नहीं आया तो जनता को
सत्ता परिवर्तन करने में वक्त नहीं लगेगा. कोसीवासियों के विकास की जायज
मांग तो निश्चय ही पूरा होगा. विकसित बिहार का सपना होगा साकार होगा. जब
कोसी क्षेत्र को मिलेगा अपना अधिकार!
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